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कलि युग – The era of Kaliyug (Hindi)

क्या आप जानते हैं कि कलि युग शब्द का क्या अर्थ है? महाभारत काल में ही कलि युग के बारे में भविष्यवाणियाँ कर दी गई थीं? श्री कृष्ण ने पाण्डवों को कलि युग के बारे में विस्तृत जानकारियाँ दे दी थीं?

अचरज में डाल देने वाली बात यह है कि वे अनुमान और भविष्यवाणियाँ आज के संदर्भ में बिल्कुल सटीक हैं।

क्या आप जानते हैं कि हम कलि युग के किस चरण में हैं? हजारों – लाखों वर्ष पहले कलि युग के बारे में क्या भविष्यवाणियाँ की गई थीं और आने वाले वर्षों में क्या हालात होंगे?

कलि युग शब्द का अर्थ है – काला युग / कलह अथवा क्लेश का युग।

कलि युग की शुरुआत लगभग पाँच हज़ार वर्ष पहले हुई। माना जाता है कि कलि युग लगभग ४,३२,००० वर्ष लम्बा चलेगा। अभी कलि युग का पहला चरण ही चल रहा है और लगभग ४,२७,००० वर्ष अभी बाक़ी हैं।

आइए। अब हम आपको बताते हैं कि क्या थी कलि युग से जुड़ी वे १० भविष्यवाणियाँ, जिन्हें सुन कर आप भी आश्चर्य में पड़ जाएँगे?

१ – पहली भविष्यवाणी यह है कि कलि युग में इंसान प्रकृति से दूर होता जाएगा। अपने फ़ायदे के लिए वह प्राकृतिक साधनों का अन्धाधुन्ध उपयोग करता जाएगा। कलि युग के अन्त में मनुष्य की अवस्था ऐसी होगी कि अन्न नहीं उगेगा। एक समय ऐसा भी होगा, जब पृथ्वी अनुपजाऊ हो जाएगी। वृक्षों पर फल – फूल नहीं पनपेंगे। गाएँ दूध देना बन्द कर देंगी। पृथ्वी का तापमान असहनीय होने की सीमा तक बढ़ जाएगा। कलि युग में लोगों की आँखें बारिश की प्रतीक्षा में, आकाश की ओर ही लगी रहेंगी।

कलि युग का अन्त निकट आने की स्थिति में गंगा नदी सूख जाएगी और बैकुण्ठ धाम की ओर लौट जाएगी? इतना ही नहीं, बल्कि
समस्त देवी – देवता पृथ्वी का त्याग कर देंगे।

२ – दूसरी भविष्यवाणी के अनुसार इंसान की औसत उम्र कम होती जाएगी। जीवन की गुणवत्ता गिरती जाएगी। भविष्यवाणी के अनुसार कलि युग की ओर जाते – जाते मनुष्य की आयु मात्र २० से ३० वर्ष रह जाएगी। भविष्यवाणियों के अनुसार यह तक उल्लेख किया गया है कि १६ वर्ष में लोग बूढ़े हो जाएँगे और २० वर्ष की आयु में मृत्यु को प्राप्त हो जाएँगे। युवावस्था लगभग समाप्त होती जाएगी। मनुष्य का शरीर भी बौना और दुर्बल होने लगेगा।

३ – तीसरी भविष्यवाणी की मानें तो जैसे – जैसे हम घोर कलियुग की ओर बढ़ेंगे, वैसे – वैसे समाज में मानवता ख़त्म होती जाएगी। दया – क्षमा – परोपकार जैसी प्रवृत्तियाँ क्षीण होती जाएँगी। सभी घोर स्वार्थ भाव से कार्य करेंगे। इंसानियत महज़ एक शब्द रह जाएगा।

४ – चौथी भविष्यवाणी के मुताबिक़ समाज में अपराधी प्रवृत्तियों का बोलबाला होगा। सभी एक – दूसरे को लूटने से बाज़ नहीं आएँगे। कलि युग में समाज हिंसक हो जाएगा। जो बलवान होगा, वही कलि युग में सब पर राज करेगा। दान – पुण्य कर्म नहीं होंगे। अपराधी प्रवृत्तियाँ वाले लोग समाज में उच्च पदों पर होंगे।

५ – पाँचवी भविष्यवाणी कहती है कि समाज में वेद – पुराणों का महत्व नहीं रहेगा। सच के स्थान पर झूठ बढ़ता जाएगा। मनुष्यों में लोभ / क्रोध की प्रवृत्तियाँ बढ़ती जाएँगी। संस्कारहीनता बढ़ेगी। नैतिकता एक शब्द बनकर रह जाएगी। सत्कर्मों का पालन करने वाले नहीं रहेंगे। पाखण्ड का उपयोग कर मनुष्य आगे बढ़ने में जुटा रहेगा। मनुष्य पाप भावों से घिरा रहेगा।

६ – छठी भविष्यवाणी कहती है कि आपसी रिश्तों में ईमानदारी कम होती जाएगी। कलि युग के विषय में लिखा गया है कि पिता और पुत्र के सम्बन्ध भी इतने ख़राब हो जाएँगे कि वे एक – दूसरे के प्रति बेहिचक हिंसक भी हो जाएँगे। पुत्र, माता – पिता पर हाथ उठाने से भी नहीं हिंचकेंगे। भाई – भाई एक दूसरे के शत्रु हो जाएँगे। निकट सम्बन्धों में मधुरता नहीं बचेगी। मात्र स्वार्थ और भय आधारित सम्बन्ध बचेंगे। समाज में प्रेम भाव समाप्त होता जाएगा।

७ – सातवीं भविष्यवाणी के अनुसार विवाह को धर्म नहीं माना जाएगा। विवाह के प्रति विश्वास और आस्था गिरती जाएगी। दाम्पत्य सम्बन्धों में मधुरता और सामंजस्य का भाव नहीं बचेगा। पति – पत्नी दोनों ही स्वयं को महत्वपूर्ण समझेंगे और दूसरे का अपमान करेंगे। विवाह सम्बन्धों में कटुता रहेगी। अलगाव और तलाक़ बढ़ेंगे।

८ – आठवीं भविष्यवाणी की मानें तो धन की उत्तम स्थिति भोग को ही माना जाएगा। दान और बचत की आदत कम होती जाएगी। लोग बिना सोचे – समझे ख़र्च करेंगे। लोगों में बेवजह ख़र्च की आदतें बढ़ेंगी।

९ – नौवीं भविष्यवाणी के मुताबिक़ समाज में विलासिता की प्रवृत्ति बढ़ेगी। इन्द्रियों के सुख की ओर ही सब का ध्यान रहेगा। मानसिक शान्ति नहीं बचेगी। घर – घर में क्लेश और कलह रहेगा। हर समय तनाव और चिंता बनी रहेगी। मात्र बाहरी दिखावे पर ही लोगों का ध्यान रहेगा।

१० – दसवीं भविष्यवाणी कहती है कि स्वस्थ लोग बहुत कम होंगे। कम उम्र में ही बीमारियाँ बढ़ती जाएँगी। लोग देह शुद्धि को ओर ध्यान ही नहीं देंगे। बिना स्नान अथवा पूजा – पाठ किए भोजन करने की तामसिक प्रवृतियों का बोलबाला होगा। लोगों की अकाल मृत्यु होगी।

कलि युग के अन्त के सम्बन्ध में महाभारत में उल्लेख है कि इस युग का अन्त प्रलय से होगा। हालाँकि यह जल प्रलय नहीं, बल्कि पृथ्वी पर लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण होगा।

कलि युग के अन्त में भयानक तूफ़ानों / भूकम्पों और आपदाओं के आने की आशंकाओं का वर्णन मिलता है। भविष्यवाणी के अनुसार धरती का कुछ हिस्सा अनुपजाऊ हो जाएगा। अधिकाधिक आपदाएँ घटेंगी और अकाल मृत्यु होगी।

 

सारे हालातों के बावजूद ऐसा नहीं है कि कलियुग के बाद कुछ भी अच्छा या सकारात्मक नहीं होगा। श्रीमद्भागवत् पुराण और भविष्य पुराण में कलि युग के अन्त का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। भविष्यवाणियों के अनुसार भगवान् विष्णु कल्कि का अवतार धारण कर अधर्म का नाश करेंगे। इस प्रकार समाज में पुन: धर्म की स्थापना होगी।

धर्म की जय हो।