क्यूँ महत्वपूर्ण है ओम् ध्वनि- Om Chanting Benefits (Hindi)

ओम् ब्रह्माण्ड में उपस्थित समस्त ध्वनियों का प्रारम्भिक और मूल स्वरूप है।

ओम् को प्रथम ध्वनि माना जाता है।

वेदों के अनुसार ब्रह्माण्ड में ईश्वररूपी परमतत्व अर्थात परम मूल ऊर्जा को व्यक्त करने का शब्द ओम् ही है। यह सार्वभौमिक शब्द है, जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की आवाज़ है। संस्कृत भाषा में ओम् शब्द तीन अक्षरों से बना है – “अ”, “उ”, और “म”

हिन्दू धर्म के अनुसार ओम् को एक दिव्य ध्वनि, मंत्र और तरंग माना गया है, जिसमें उच्च आध्यात्मिक और सृजनात्मक शक्ति होती है।

हमारे सभी वेदमंत्रों का उच्चारण भी ओम् ध्वनि से ही शुरू होता है, जो ईश्र्वरीय शक्ति की पहचान है। निस्सन्देह ओम् वह दिव्य ध्वनि है, जो पृथ्वी – ग्रह – नक्षत्र – आकाशगंगाओं की गति से उत्पन्न होती है।

यह कोरी कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविकता है। विभिन ग्रहों की ध्‍वनियों को नासा के वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड किया है, जिसे प्‍लैनेट साउंड के नाम से इंटरनेट पर भी खंगाल कर, सुना जा सकता है। विज्ञान भी ओम् ध्वनि की दिव्यता को स्वीकार कर चुका है।

मनुष्य की प्रत्येक श्वास से ओम्‌ की ही ध्वनि उत्पन्न होती है। यहाँ तक की निर्वात अर्थात शून्य में भी ओम् की ध्वनि होती है, जिसे ध्यान के अभ्यास से सुना जा सकता है।

ओम् को अनाहत ध्वनि या नाद भी कहा जाता है, जो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर और इस ब्रह्मांड में सतत गूँजता रहता है। संपूर्ण ब्रह्मांड में यह निरन्तर चलता रहता है।

महर्षि पतंजलि के ग्रंथ योदर्शन के २७वें सूत्र के अन्तर्गत ओम्‌ को ईश्वर शब्द का बोध करने वाला दिव्य शब्द कहा गया है। ओम् की ध्वनि को समस्त मंत्रों की मूल ध्वनि माना गया है, जिसके बिना कोई भी मंत्र अपूर्ण है।

ओम् शब्द का महत्व आध्यात्मिक जीवन में तो है ही, मानसिक और शारीरिक पक्षों से भी महत्वपूर्ण है। ओम् ध्वनि के उच्चारण के ज़रिए, समूचे ब्रह्माण्ड से जुड़ा जा सकता है।

ओम् ध्वनि के उच्चारण की सनातन परम्परा रही है, जहाँ ओम् का विविध प्रकार से उच्चारण किया जाता रहा है। प्राचीन योग गुरू और आध्यात्मिक गुरू इस परम्परा का निर्वहन करते रहे हैं।

ओम् ध्वनि के उच्चारण का महत्व –

क्या ऐसा सम्भव है कि मात्र छह मिनट में किसी प्रकार करोड़ों विकार दूर हो जाएं? वैज्ञानिक शोधों से स्पष्ट हुआ है कि मात्र छह मिनट ओम् शब्द का उच्चारण करने से सैकड़ों रोग ठीक हो जाते हैं। विश्वास कीजिए, किसी दवा या उपचार का भी इतना प्रभाव नहीं होता।

ज्यों ही ओम् ध्वनि का उच्चारण किया जाता है, हमारे शरीर में एक सकारात्मक तरंग उपजती है, जिसे सहज महसूस किया जा सकता है।

ओम् शब्द के उच्चारण से शरीर के प्रत्येक अंग में संचरण महसूस किया जा सकता है। छह मिनट ओम् का उच्चारण करने से मस्तिष्क में विशेष कम्पन्न [वाइब्रेशन] होता है, और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है।

यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुका है कि ओम् शब्द का उच्चारण आपको बहुत सकारात्मक और प्रसन्न महसूस कराने का कार्य करता है। यह आपको अधिक शांत – युवा – ऊर्जावान बनाता है। ओम् का दैनिक उच्चारण, लक्ष्य की ओर एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायक है। यह आपकी आत्मा को शुद्ध करने का कार्य करता है, जिसे आप स्वयं महसूस करेंगे।

कई प्रकार के मस्तिष्क सम्बन्धित रोग दूर होते हैं। तनाव का स्तर कम होता है। ओम् का उच्चारण याद्दाश्त बढ़ाने में भी अति सहायक है।

सुबह और साँझ के समय छह मिनट ओम् शब्द का निरन्तर तीन माह तक उच्चारण करने पर रक्त संचार संतुलित होता है और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। रक्त चाप और हृदय स्म्बन्धित रोग ठीक हो जाते हैं। कोलेस्ट्रोल का स्तर संतुलित हो जाता है।

घबराहट, बेचैनी, भय और तनाव जैसे रोग ठीक हो जाते हैं।

कंठ में विशेष कम्पन्न होता है, जिससे माँसपेशियों को शक्ति मिलती है।

थाइरॉइड, गले की सूजन दूर होती है और स्वर सम्बन्धित दोष दूर हो जाते हैं।

पेट में भी विशेष कम्पन्न और दबाव महसूस होता है। एक माह तक दिन में तीन बार छह मिनट तक ओम् शब्द के उच्चारण से पाचन तन्त्र, लीवर और आँतों को शक्ति प्राप्त होती है। पाचन तंत्र संतुलित होता है और पेट से सम्बन्धित रोग ठीक होने लगते हैं।

फेफड़ों में विशेष कम्पन्न होता है। जिससे फेफड़े मज़बूत होते हैं, श्वसन तंत्र की शक्ति बढ़ती है। छह माह में अस्थमा, राजयक्ष्मा [टी.बी.] जैसे रोगों में लाभ होता है।

ओम् शब्द के उच्चारण से निस्सन्देह आयु भी बढ़ती है।

ये तथ्य वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं।

ओम् शब्द के उच्चारण से त्वचा भी निर्मल होती जाती है। दैनिक उच्चारण से होने वाले सकारात्मक आंतरिक प्रभाव, निस्सन्देह चेहरे और शरीर पर भी दिखाई देने लगते हैं।

साथ ही, यह इर्द – गिर्द समूचे वातावरण में सकारात्मक तरंगों का प्रसार करता है।

जब ओम् शब्द का उच्चारण किया जाता है, हमारे शरीर में एक मधुर प्रभाव उत्पन्न होता है। इस उच्चारण के माध्यम से, समूचे ब्रह्माण्ड से गहरा जुड़ाव महसूस किया जा सकता है। हालाँकि इस प्रभाव को ठीक – ठीक शब्दों में नहीं कहा जा सकता, चूँकि यह प्रभाव बहुत दिव्य, गहन, आंतरिक और आध्यात्मिक है। यह समस्त सम्भावनाओं और पक्षों को स्वयं में समाहित कर लेता है।

कैसे करें ओम् शब्द का उच्चारण –

आज के अस्त – व्यस्त जीवन में, कुछ समय ओम् शब्द का उच्चारण करें और नियमित रूप से करें।

ओम् का उच्चारण लम्बे स्वर में करें। धीरे – धीरे आप बदलाव महसूस करने लगेंगे।

आरामदायक ध्यान करने की स्थिति में बैठ जाएँ। ध्यान रखें कि रीढ़ की हड्‍डी, सिर और गर्दन बिल्कुल सीधे रहें।

आँखों को बंद कर लें और एक गहरी साँस लें। अब श्वास छोड़ते हुए, ओम् शब्द बोलना शुरू करें।

नाभि क्षेत्र में “ओ”आवाज़ से होने वाले कंपन्न को महसूस करें और इस कंपन्न को ऊपर की ओर बढ़ते हुए महसूस करें।

मंत्र का उच्चारण करते हुए, कंपन्न को गले की ओर बढ़ते हुए महसूस करें।

ज्यों ही कंपन्न गले तक पहुँचता है, ध्वनि को “म” एक गहरी ध्वनि में परिवर्तित करें।

कंपन्न तब तक महसूस करें, जब तक वह मस्तक तक नहीं पहुंचे।

अंतिम मंत्र के उच्चारण के बाद भी थोड़ा बैठे रहें और पूरे शरीर में ओम् की ध्वनि के कंपन्न को महसूस करें।

शुरूआत के लिए, ओम् ऑडियोज़ सुनें, साथ ही ओम् का उच्चारण करें और जीवन में सकारात्मकता लाएँ।